Digital India Essay In Hindi

Digital India Essay In Hindi

Digital India Essay In Hindi:भारत सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान नाम से शुरू किया गया। यह अभियान इंटरनेट के माध्यम से देश में क्रांति लाना है, साथ ही इंटरनेट को सशक्त करके भारत के तकनीकी पक्ष को मजबूत करना है। यह अभियान भारत सरकार द्वारा ‘डिजिटल इंडिया अभियान’ नाम से शुरू किया गया है।

Digital India Essay In Hindi

एक कार्यक्रम, दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में टाटा ग्रुप के चेयरमैन साइरस मिस्त्री, आरआईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी, विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी आदि जैसे दिग्गज उद्योगपतियों की उपस्थिति में 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इंडिया अभियान के नाम से शुरू किया गया।

प्रस्तावना

देश को डिजिटल रूप से विकसित करने और देश के आईटी संस्थान में सुधार करने के लिए, डिजिटल इंडिया महत्वपूर्ण पहल है। डिजिटल इंडिया अभियान की विभिन्न योजनाओं जैसे डिजिटल लॉकर, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-साइन आदि को शुरु करके इस कार्यक्रम का अनावरण किया गया है।

डिजिटल भारत की शुरुआत

2015 में भारत सरकार द्वारा आयोजित एक विशाल संकलन जिसे डिजिटल इंडिया के रूप में जाना जाता है, इसने देश के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं तक आसानी से पहुंचने के लिए लागू किया। देश भर में लोग इस कार्यक्रम के तहत प्रौद्योगिकी पहुंच में सुधार करते हैं। डिजिटल इंडिया का उद्देश्य देश को डिजिटल-सक्षम समाज में परिवर्तित करना है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी सुविधाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से निवासियों को उपलब्ध हों।

डिजिटल भारत की समस्या

भारत में ई-गवर्नेंस के सफर में जन-आधारित सेवाओं पर जोर देने के साथ व्यापक क्षेत्रीय प्रयोगों के लिए नब्बे के दशक में कई उतार-चढ़ाव देखे। बाद में, कई राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों ने विभिन्न ई-गवर्नेंस परियोजनाएं चलाईं। हालांकि ये ई-गवर्नेंस जन-आधारित परियोजनाएं थी, लेकिन ये उतने प्रभावी नहीं हुए, जितना होना चाहिए था। 2006 में शुरु हुई भारत सरकार की यह पहल, विभिन्न डोमेन को कवर करने वाले 31 मिशन मोड प्रोजेक्ट को साथ ले चल रही थी। देश भर में कई ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के बाद भी  ई-गवर्नेंस वो सफलता नहीं दे पाई, जो अपेक्षित थी।

यह महसूस किया गया है कि देश में ई-शासन को सुनिश्चित करने के लिए बहुत अधिक जोर की आवश्यकता है, जो इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं, उत्पादों, उपकरणों और नौकरी के अवसरों को शामिल करने वाले समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने के लिए, भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को भारत में डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए आरंभ किया है

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डिजिटल इंडिया के तीन प्रमुख कार्य:

(1) प्रत्येक नागरिकों को डिजिटल इंडिया की उपयोगिता से रूबरू कराना

(2) नागरिक की मांग पर शासन और सेवाएं प्रदान करना

(3) हर नागरिक को डिजिटल शक्ति प्रदान करना

डिजिटल इंडिया कैसे कार्य करेगा:

डिजिटल इंडिया से डेटा का डिजिटलाइजेशन आसानी से होगा जो भविष्य में चीजों को तेज और दक्ष बनाने में मदद करेगा इसमें कागजी कार्य और समय और मानव की मेहनत की भी बचत होगी। सरकार और निजी क्षेत्र में गठबंधन स्थापित करें कई बड़े गांव में डिजिटल लेस इलाकों में भी बदलाव लाएगा और वह भी डिजिटलाइजेशन होगा। भारत के सभी गांव और शहर और नगर तकनीकी होंगे ( राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय) मुख्य कंपनियां 2019 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की योजना है इसमें अंबानी द्वारा 2.5 लाख करोड़ का निवेश किया गया है इस योजना द्वारा इंटरनेट सेवा के साथ दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचेगा इंटरनेट से नागरिक को सुधार कर सकता है इस योजना से हर एक को काफी फायदा होगा।

डिजिटल इंडिया द्वारा चलाई जाने वाली प्रमुख योजनाएं: डिजिटल इंडिया द्वारा भारत के विकास के लिए कुछ योजनाएं चलाई जा रही है जिसमें पहले से प्रचलित ई गवर्नेंस योजना का यह बहुत ही प्रतिभाशाली रूप है जिसे नव स्तंभों का नाम दिया गया है जो प्रत्येक नागरिक को कई डिजिटल सुविधाएं प्रदान करेगा।

वो स्तंभ इस प्रकार है:

(1) ब्रॉड बैंड हाइवे

(2) लोकहित पहुंच कार्यक्रम

(3) मोबाइल कनेक्टिविटी

(4) एक क्रांति

(5) ई गवर्नेंस

(6) सभी की सूचना

(7) नौकरी के लिए आई .टी.

(8) पूर्व फसल कार्यक्रम

(9)इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण

कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण

(नेट.जीरो .इम्पोर्ट्स ) के तहत सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का निर्माण देश में ही किया जाएगा जिसमें मोबाइल_ सेट अप बॉक्स, ,वी.सेट , फेब लेस डिजाइन ,कस्टमर और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक ,स्मार्ट एनर्जी मीटर ,माइक्रो एटीएम ,स्मार्ट कार्ड, जैसे उपकरण हमारे देश में ही निर्माण होगा और इन पर ज्यादा फोकस किया जाएगा।

डिजिटल इंडिया द्वारा नौकरियां:

कौशल विकास कार्यक्रम को इससे जोड़कर कंपनियां कार्य प्रणाली के अनुसार ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे रोजगार में काफी मदद मिलेगी।

अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम:

इसके अंतर्गत डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने कुछ नियम बनाए हैं जिसको पूरे देश में लागू किया जाएगा।

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डिजिटल इंडिया की मुख्य सेवाएं

इस अभियान की सेवाओं का उपयोग करने के लिए सरकार ने भारतीय नागरिकों के सभी डेटा को आधार कार्ड से लिंक करवाने की प्रक्रिया पर भार दिया है। जब भारतीय नागरिकों के सारा डेटा आधार कार्ड से लिंक हो जाएंगे, तब सभी लोग घर बैठे-बैठे सरकारी और गैर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

इस अभियान की वजह से हम पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, गैस सिलेंडर, जीवन बीमा और निर्वाचन कार्ड जैसे काम घर पर कर सकेंगे। इसके अलावा हमारे जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी और मार्कशीट को ऑनलाइन रखने की सुविधा मिलेगी। जिसकी वजह से हमें अपने जरूरी दस्तावेज हमेशा साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। इन दस्तावेज और जरूरी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए हमे ई-लॉकर जैसी सुविधा भी इस अभियान के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

डिजिटल भारत अभियान के तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, पुलिस थाने और अस्पताल जैसे सरकारी कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। 2.5 लाख गांवों के स्कूल और विश्वविद्यालयों में ब्रॉडबैंड और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ-साथ आईटी क्षेत्र में डिजिटल अभियान की वजह से 1.7 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा।

डिजिटल इंडिया के समर्थन में विदेश के बड़े-बड़े उद्धोगपति भी शामिल हो रहे है। जैसे फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत के ग्रामीण इलाकों में वाईफाई हॉटस्पॉट लगाने का वादा किया था। गुगल ने भी भारत के 500 रेलवे स्टेशनों पर ब्रॉडबैंड सुविधा प्रदान करने का वादा किया था। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत के पांच हजार गाँवों में ब्रॉडबैंड सुविधा प्रदान करने का वादा किया था।

ओरेकल जैसी कई बड़ी कंपनियां भी हमारे देश के 20 राज्यों पर निवेश करने की योजना बना रही है। इस अभियान के आंकड़ो की बात करे तो 31 दिसंबर 2018 तक हमारे देश में 121 करोड़ मोबाइल फोन, 44.6 करोड़ स्मार्टफोन और 123 करोड़ डिजिटल आधार कार्ड थे। 2017 में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 481 मिलियन थी जो आज के समय 570 मिलियन से भी ज्यादा है। इन आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि यह अभियान कुछ हद तक सफल रहा है।

हानि, डिजिटल इंडिया का महत्व

विश्व के विकसित देशो में भारत को लाने के लिए भारत सरकार द्वारा किया गया एक प्रयास यानि डिजिटल भारत प्रोग्राम। इस योजना का मुख्य उदेश्य देश को विज्ञान और टैकनोलजी के क्षेत्र में सशक्त रूप से आगे बढ़ाकर भारत को डिजिटल बनाना है। क्योकि आज के आधुनिक युग में जिस देश ने विज्ञान और तकनीक को अपना लिया है, वह देश एक शक्तिशाली और महासत्ता बनकर उभरा है। इसी कारण हमें एक ऐसे अभियान की जरूरत थी जो भारत को डिजिटल रूप से मजबूत बनाए।

इस अभियान के तहत देश की ऑनलाइन व्यवस्था में सुधार होगा और सामान्य नागरिकों को आसान ऑनलाइन सरकारी सुविधा प्रदान की जाएगी। यह अभियान गाँव ओर शहर के बिछड़े लोगों के लिए बहुत उपयोगी है। इस अभियान से लोग तेजी से इंटरनेट सेवा का लाभ उठा सकेंगे ।

डिजिटल इंडिया की शुरुआत

इस अभियान की शुरुआत हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 1 जुलाई, 2015 को नई-दिल्ली के इंदिरा गाँधी स्टेडियम में की थी। इस अभियान का उदघाटन साइरस मिस्त्री, अजीम प्रेमजी और मुकेश अम्बानी जैसे देश के दिग्गज उद्योगपति की उपस्थति में किया गया था।

इस अभियान के तहत ई-शिक्षा, ई-स्वास्थ्य, डिजिटल लॉकर और राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल जैसी कई अलग-अलग योजनाएं शुरू की गईं। इसके अलावा भारत के कई आईटी संस्थान सेवाए और सरकारी सेवाओं को देश के हर नागरिक तक आसानी से पहुंचाने के लिए डिजिटल इंडिया एक महत्वपूर्ण पहल है। भारत सरकार ने 2019 तक डिजिटल भारत अभियान को पूरा करने की योजना बनाई थी।

डिजिटल भारत के तीन मुख्य घटक

डिजिटल भारत का सबसे पहला घटक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर है। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर यानि भारत के हर क्षेत्र में डिजिटल सेवाएं पहुँचाने के लिए एक मजबूत और बुनियादी ढांचा तैयार करना। इसमें विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर अधिक बल दिया गया है, क्योंकि आज भी भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और नेटवर्क नहीं पहुंचा है।

इस अभियान का दूसरा मुख्य घटक डिजिटल सेवा का वितरण करना है। यानी भारत सरकार द्वारा की जाने वाली किसी भी सहाय या सेवा का डिजिटल रूप से सही वितरण करना। इससे देश में भ्रष्टाचार को भी काफी हद तक रोका जा सकता है। क्योकि अगर हमारे पैसो की सारी लेन-देन डिजिटल हो जाएगी तो इन सभी लेन-देन पर हमेशा सरकार की नज़र होगी।

डिजिटल भारत का तीसरा घटक डिजिटल साक्षरता है। डिजिटल साक्षरता यानि डेस्कटॉप, पीसी, लैपटॉप, स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का ज्ञान होना। यदि लोगों को इन सभी उपकरणों का ज्ञान नहीं होगा तो वे इनका ठीक से उपयोग नहीं कर पाएंगे। इस डिजिटल भारत अभियान के तहत भारत के 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके अलावा भारत की राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क परियोजना का संचालन करने वाली कंपनी भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड इस अभियान की संरक्षक है।

डिजिटल इंडिया की मुख्य सेवाएं

इस अभियान की सेवाओं का उपयोग करने के लिए सरकार ने भारतीय नागरिकों के सभी डेटा को आधार कार्ड से लिंक करवाने की प्रक्रिया पर भार दिया है। जब भारतीय नागरिकों के सारा डेटा आधार कार्ड से लिंक हो जाएंगे, तब सभी लोग घर बैठे-बैठे सरकारी और गैर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

इस अभियान की वजह से हम पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, गैस सिलेंडर, जीवन बीमा और निर्वाचन कार्ड जैसे काम घर पर कर सकेंगे। इसके अलावा हमारे जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी और मार्कशीट को ऑनलाइन रखने की सुविधा मिलेगी। जिसकी वजह से हमें अपने जरूरी दस्तावेज हमेशा साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। इन दस्तावेज और जरूरी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए हमे ई-लॉकर जैसी सुविधा भी इस अभियान के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

डिजिटल भारत अभियान के तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, पुलिस थाने और अस्पताल जैसे सरकारी कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। 2.5 लाख गांवों के स्कूल और विश्वविद्यालयों में ब्रॉडबैंड और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ-साथ आईटी क्षेत्र में डिजिटल अभियान की वजह से 1.7 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा।

डिजिटल इंडिया के समर्थन में विदेश के बड़े-बड़े उद्धोगपति भी शामिल हो रहे है। जैसे फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत के ग्रामीण इलाकों में वाईफाई हॉटस्पॉट लगाने का वादा किया था। गुगल ने भी भारत के 500 रेलवे स्टेशनों पर ब्रॉडबैंड सुविधा प्रदान करने का वादा किया था। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत के पांच हजार गाँवों में ब्रॉडबैंड सुविधा प्रदान करने का वादा किया था।

ओरेकल जैसी कई बड़ी कंपनियां भी हमारे देश के 20 राज्यों पर निवेश करने की योजना बना रही है। इस अभियान के आंकड़ो की बात करे तो 31 दिसंबर 2018 तक हमारे देश में 121 करोड़ मोबाइल फोन, 44.6 करोड़ स्मार्टफोन और 123 करोड़ डिजिटल आधार कार्ड थे। 2017 में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 481 मिलियन थी जो आज के समय 570 मिलियन से भी ज्यादा है। इन आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि यह अभियान कुछ हद तक सफल रहा है।

डिजिटल इंडिया अभियान के 9 स्तंभ

ब्रॉडबैंड हाइवेज सुविधा

हर घर में मोबाईल फोन सुविधा

लोकहित पहुंच कार्यक्रम

ई गवर्नेंस

ई-क्रांति (सेवाओं की इलेक्ट्रानिक डिलीवरी)

सभी के लिए सूचना

ज्यादा से ज्यादा आईटी नौकरियां

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन

पूर्व फसल कार्यक्रम (अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम)

सार्वजनिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम

डिजिटल इंडिया के लाभ और हानि

इस दुनिया में बसी हर चिज के दो पहलू होते है। एक होता है लाभ और दूसरा होता है हानी। इसी तरह, डिजिटल इंडिया के भी दो पहलू है। कुछ जगहों पर इसके फायदे है तो कुछ जगहों पर इसके नुकसान है। बारी-बारी हम दोनों को जानेंगे।

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डिजिटल इंडिया के लाभ

वर्तमान के इस आधुनिक युग को हम डिजिटल युग भी कह सकते है। क्योकि आज हमारे आस-पास हर काम कोई न कोई इलेक्ट्रॉनिक्स से ही हो रहा है।

भ्रष्टाचार मे कमी

हमारे देश के ग्रामीण इलाकों के लोग भ्रष्टाचार के ज्यादा शिकार होते है। क्योंकि जानकारी कम होने की वजह से बड़े अधिकारी उनसे पैसे लेते हैं, जबकि यह सरकार की ओर से फ्री होता है। कई बार तो उन्हें सरकारी सुविधाओं और योजनाओं की जानकारी भी नहीं मिलती है। जिस वजह से बड़े अधिकारी इन सुविधाओं का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते है।

लेकिन डिजिटल इंडिया के इस अभियान से देश का भ्रष्टाचार कम होगा। क्योंकि इस अभियान से भारत के हर घर में फोन और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे इन लोगों तक भारत सरकार की सभी योजनाओं की खबर पहुंचेगी। इस तरह डिजिटल इंडिया से भ्रष्टाचार में काफी हद तक कमी आएगी।

ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा

इस अभियान के तहत भारत के हर ग्रामीण क्षेत्र में इंटरनेट की पहुंच होगी। जिसकी वजह से ऐसे इलाकों के विद्यार्थियों को भी कंप्यूटर और इंटरनेट की शिक्षा मिलेगी। उसके बाद छात्र खुद इंटरनेट से नई-नई शिक्षा सामग्री देखेंगे। अगर इससे किसी एक विध्यार्थी की ज़िंदगी बदल जाए तो यह अभियान सफल हो जाएगा। इसका एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि, ग्रामीण छात्रों को बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। वे गांव में रहकर इंटरनेट के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाएंगे।

कालाबाजारी और टैक्स चोरी कम होगी

डिजिटल इंडिया के तहत सभी काम ऑनलाइन हो जाएंगे। उसके साथ-साथ पैसो की लेन-देन और भुगतान भी ऑनलाइन किया जाएगा। जिससे हमारी सरकार इन सभी कार्यो और पैसो की लेन-देन पर नज़र रख सकती है। सरकार यह भी जान सकेगी कि किसने टैक्स का भुगतान किया है और किसने नहीं। इससे देश का कोई भी व्यक्ति टैक्स चोरी, कालाबाजारी और भ्रष्टाचार नहीं कर सकेगा। जब भ्रष्टाचार कम होगा तो देश कि अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनेगी।

सरकारी कार्यालयो में लगी लाइनों से छुटकारा

डिजिटल भारत अभियान की वजह से हमे लंबी-लंबी सरकारी कार्यालयो की लाइनों से छुटकारा पा सकेंगे। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि सरकारी विभागों में काम बहुत धीमी गति से होता है। जिसके कारण सामान्य लोगो को अपना काम करवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनो में लगना पड़ता है। इसकी वजह से उनका काफी समय खराब होता है और रोजगार भी बाधित होता है। लेकिन अब ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण पैन कार्ड, राशन कार्ड, बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी कार्यालयों के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी।

देश तेजी से विकास करेगा

इस अभियान की वजह से देश का विकास तेजी से होगा। क्योकि इसकी वजह से हमारे देश के बिछड़े हुए गांवों का विकास होगा। भारत के हर गांव में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इंटरनेट का उपयोग कर देश के विकास में अपना योगदान दे सके।

डिजिटल इंडिया अभियान के अन्य लाभ

वर्तमान में हम किसी भी सरकारी परीक्षा का फॉर्म और उसकी फीस अपने घर बैठ कर भर सकते है। इसके अलावा आप अपने सरकारी कार्यो को भी घर बैठ कर आसानी से कर सकते है। आज के समय में डिजिटल इंडिया की वजह से नए-नए रोजगार के अवसर प्रदान हो रहे है। देश की IT संस्थानों को बेहतर बनाने के लिए और उन्हें डिजिटल रूप से विकसित करने के लिए यह अभियान बहुत महत्वपूर्ण है।

डिजिटल इंडिया की हानि

वैसे हमें डिजिटल इंडिया मिशन से बड़े पैमाने पर नुकसान देखने को नहीं मिला है। लेकिन इस अभियान का नुकसान गरीब,

पछात और कम पढ़े-लिखे लोगों को होगा। क्योकि कई लोगो के पास या तो स्मार्टफोन नहीं होगा या फिर उन्हें स्मार्टफोन की नई तकनीकों को समझने में वक्त लगेगा। जैसे की, अगर किसी के पास स्मार्टफोन ही नहीं है तो वो BHIM APP का लाभ कैसे उठा पाएगा। और अगर लोगो को इन सब चीज़ों का उपयोग करना ही नहीं जानते तो डिजिटली होने का क्या फायदा? इसी कारण हमारा देश आज भी डिजिटली असक्षम है।

इसके अलावा डिजिटलीकरण ने मनुष्य को सामाजिक रूप से दूर किया है। क्योकि मानव पूरी तरह से मशीनों पर निर्भर हो चुका है। इंटरनेट के इस्तेमाल से हमारी कोई भी चीज़ गोपनियता में नहीं रहती। हर कोई हमारे बारे में जान सकता है। इससे भी अपराध को बढ़ावा मिलता है। लेकिन फिर भी दुनिया में जब कोई बड़ा बदलाव हुआ है, तो वह एक झटके में नहीं हुआ। लोगों ने उस बदलाव को समझने और उसका लाभ उठाने में समय लिया है। इस तरह डिजिटल इंडिया मिशन को समझने में लोगो को थोड़ा समय लगेगा। लेकिन उसके बाद यह अभियान बहुत तेजी से सफलता के कदमों छूएगा।

डिजिटल इंडिया का उद्देश्य

डिजिटल इंडिया का सबसे पहला उदेश्य भारत के प्रत्येक गांव तक ब्रॉडबैंड को पहुंचाना था। इसके अलावा देश की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड को पहुंचाना और हाई स्पीड इंटरनेट से भारत के सभी नागरिको को जोड़ना था।

इलेक्ट्रानिक उत्पादन को बढ़ावा देकर IT क्षेत्र में रोजगार लाना भी इस अभियान का मुख्य उदेश्य था। क्योकि जब भी हमारी सरकार कोई नयी योजना लाएगी तो उसका सारा काम ऑनलाइन होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में नए-नए IT रोजगार पैदा होंगे। जैसे कि, राजस्थान की ई-मित्र योजना से वहा के कई लोगों को रोजगार मिला था।

credit:SK TEACH

उपसंहार :

कई बड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि विकसित और विकासशील देशों के बीच सिर्फ विज्ञान और तकनीक की दीवार है। जिस देश ने इस दीवार को पार कर लिया वह विकसित और जो रह गया वह विकासशील। इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा विज्ञान और तकनीक पर ध्यान देना चाहिए। जिसमें डिजिटल भारत अभियान भी देश कि बहुत मदद करेगा। 

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