Essay On Air Pollution In Hindi

Essay On Air Pollution In Hindi-वायु प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

Essay On Air Pollution In Hindi:वायु प्रदूषण प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों में से एक है। वायु प्रदूषण के कारण ओज़ोन परत भी बहुत अधिक प्रभावित हो रही है जो पर्यावरण में गंभीर व्यवधान का कारण बन रही है।

Essay On Air Pollution In Hindi

मनुष्य की हमेशा बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण उनकी आवश्यकता में भी वृद्धि हो रही है जो प्रदूषण का मुख्य कारण है।

प्रस्तावना

मनुष्य की दैनिक गतिविधियाँ बहुत से खतरनाक रसायनों, वातावरण को गंदा करने का कारण होती हैEssay On Air Pollution In Hindi, जो जलवायु में नकारात्मक परिवर्तन के लिये मजबूर करती है।Essay On Air Pollution In Hindi औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया में कई हानिकारक गैसों, कणों, पेंट और बैट्रियों का आक्रामक संचालन, सिगरेट, आदि कार्बन मोनो ऑक्साइड, परिवहन के साधन कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य ज़हरीली पदार्थों को वातावरण में छोड़ते हैं।

सभी तरह के प्रदूषण पर्यावरण से जुड़े हुए हैं, जो ओज़ोन परत को हानि पहुँचाकर सूर्य की हानिकारक किरणों पर पृथ्वी पर आमंत्रित करते हैं।Essay On Air Pollution In Hindi वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए हमें दैनिक आधार पर अपनी क्रिया-कलापों में बड़े स्तर पर परिवर्तन लाने होंगे।

हमें वायु प्रदूषण के प्रभावों को कम करने के लिए पेड़ो को नहीं काटना चाहिए, सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करना चाहिए, छिडकाव करने वाली कैनों को वर्जित करना चाहिए और अन्य उन गतिविधियों को करना चाहिए जो वातावरण को प्रदूषित करने वाले तत्वों को रोकने में सहायक हो।

वायु प्रदूषण का अर्थ – Air Pollution Meaning

वायु पृथ्वी पर जीवन का एक आवश्यक तत्व हैEssay On Air Pollution In Hindi। इसी से प्राणियों एवं जीव-जंतुओं को ऑक्सीजन प्राप्त होती है, जो जीवन का आधार है और इसी से वनस्पति को कार्बन-डाई-ऑक्साइड मिलती है जिससे उसका पोषण होता है। वायु मण्डल एक कम्बल के समान है, जिसके न होने से तापमान अधिक या अति न्यून हो जाएगा। वायु मण्डल ही हमारी अल्ट्रावायलेट किरणों से रक्षा करता है और उल्काओं को जला कर नष्ट कर देता है।

वास्तव में वायु में उपस्थित गैसों पर बाहरी प्रभाव (प्राकृतिक अथवा मानवीय) ही वायु प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैEssay On Air Pollution In Hindi। हमारी पृथ्वी के वातावरण विभिन्न प्रकार की गैसों से बना हुआ है, जिसमें मानव एवं अन्य सजीव जीव-जंतुओं के जीवन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है,

जो कि वातावरण में लगभग 24% है।Essay On Air Pollution In Hindi लेकिन धीरे-धीरे पृथ्वी में हो रहे बदलाव के कारण ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है, इसमें कई प्रकार की विषैली गैसे घुल रही है।

साधारण शब्दों में कहें तो स्वच्छ वायु में रसायन, सूक्ष्म पदार्थ, धूल, विषैली गैसें, जैविक पदार्थ, कार्बन डाइऑक्साइड आदि के कारण वायु प्रदूषण होता है।

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वायु प्रदूषण की प्रकृति

जीव मण्डल का आधार वायु है। वायु में उपस्थित ऑक्सीजन पर ही जीवन निर्भर हैEssay On Air Pollution In Hindi। प्राणी वायुमण्डल से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन-डाई-ऑक्साइड निष्कासित करते हैं, जिसे हरे पौधे ग्रहण कर लेते हैं और एक संतुलित चक्र चलता रहता है।

किंतु इस संतुलन में उस समय रुकावट आ जाती है जब उद्योगों, वाहनों एवं अन्य घरेलू उपयोगों से निकलता धुआँ एवं अन्य सूक्ष्म कण, विभिन्न प्रकार के रसायनों से उत्पन्न विषैली गैस, धूल के कण, रेडियोधर्मी पदार्थ आदि वायु में प्रवेश करके, स्वास्थ्य के लिये ही नहीं अपितु समस्त जीव-जगत् के लिए हानिकारक बना देते हैं। यही वायु प्रदूषण या वायु मण्डलीय प्रदूषण कहलाता है।

वायु प्रदूषण उसी समय प्रारंभ होता Essay On Air Pollution In Hindiहै जब वायु में अवांछित तत्व एवं गैस आदि समाविष्ट हो जाते हैं, जिससे उसका प्राकृतिक स्वरूप विनष्ट हो जाता है और उससे हानि होने की संभावना अधिक हो जाती है।

वैसे तो वायु प्रदूषण की समस्या कोई नई नहीं है क्योंकि अनेक प्राकृतिक कारणों जैसे ज्वालामुखी का विस्फोट, तेज हवाओं से मिट्टी के कणों का वायु में मिलना या जंगल की आग से प्राचीन काल से वायु प्रदूषण होता आ रहा है।

जब से मानव ने आग का प्रयोग प्रारम्भ किया, तभी से प्रदूषण का प्रारम्भ हो गया, पशु चारण से उड़ने वाली रेत, खनन से प्रदूषित वायु मण्डल या गन्दगी से सूक्ष्म जीवाणुओं का वायु में फैल जाना प्राचीन काल से होता रहा हैEssay On Air Pollution In Hindi। किन्तु तब तक यह समस्या नहीं थी, क्योंकि जनसंख्या सीमित थी, आवश्यकताएँ कम थीं, ईंधन का उपयोग बहुत कम किया जाता था, प्राकृतिक वनों का पर्याप्त विस्तार था जिसके कारण प्रदूषित पदार्थ पर्यावरण से अपने-आप ही नष्ट हो जाते थे, उनसे किसी प्रकार की हानि नहीं होती थी,

क्योंकि वायुमण्डलीय प्रक्रिया में स्वत: ही शुद्ध एवं सन्तुलित होने की अपूर्व क्षमता होती हैEssay On Air Pollution In Hindi। किन्तु आज की औद्योगिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति ने इस गणित को गलत कर दिया है, क्योंकि मानव तीव्र गति से वायु मण्डल में अवशिष्ट पदार्थ विस्तारित करने लगा है। जो वायु प्रदूषण का मूल कारण है।

वायु प्रदूषण के स्रोत – Sources of Air Pollution

(1) वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत –

(i) कुछ प्राकृतिक क्रियाओं के फलस्वरूप भी वायु प्रदूषण होता है, यद्यपि यह सीमित एवं क्षेत्रीय होता है।Essay On Air Pollution In Hindi इसमें ज्वालामुखी का उद्गार एक प्रमुख प्राकृतिक क्रिया है, जिससे विस्फोट के क्षेत्र का वायु मण्डल प्रदूषित हो जाता है ।

(ii) ज्वालामुखी उद्गार के समय विशाल मात्रा में धुआँ, राख एवं चट्टानों के टुकड़े तथा विभिन्न प्रकार की गैसें तीव्र गति से वायु मण्डल में प्रवेश करती हैं और वहाँ प्रदूषण में वृद्धि हो जाती है।

(iii) वनों में लगने वाली आग (जो कभी-कभी हजारों वर्ग किलोमीटर में फैल जाती है) भी वायु प्रदूषण का कारण बनती हैEssay On Air Pollution In Hindi क्योंकि इससे धुआँ और राख के कण विस्तीर्ण हो जाते हैं।

(iv) तेज हवाओं एवं अंधी-तूफान से जो धूल के कण वायु मण्डल में फैलते हैं, वे प्रदूषण के कारण बनते हैं।

(v) समुद्री लवण के कण, खनिजों के कण भी वायु प्रदूषण में योग देते हैं।

(vi) दलदली प्रदेश में पदार्थों के सड़ने से ‘मिथेन गैस’ प्रदूषण फैलाती है।

(vii) कुछ पौधों से उत्पन्न हाइड्रोजन के यौगिक तथा पराग कण भी प्रदूषण का कारण हैं।

(viii) कोहरा प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनता है।

प्राकृतिक स्रोतों से होने वाला वायु प्रदूषण सीमित एवं कम हानिकारक होता है क्योंकि प्रकृति स्वयं विभिन्न क्रियाओं

से इसमें संतुलन बनाए रखती है।

(2) वायु प्रदूषण के मानवीय स्रोत –

यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि मानव ने अपनी विभिन्न क्रियाओं से वायु मण्डल या वायु को अत्यधिक प्रदूषित किया है और करता जा रहा है।Essay On Air Pollution In Hindi ऊर्जा के विविध उपयोग, उद्योग, परिवहन, रसायनों के प्रयोग में वृद्धि आदि ने जहाँ मानव को अनेक सुविधाऐं प्रदान की हैं, वहीं वायु प्रदूषण के रूप में संकट को भी जन्म दिया है।

(i) नियमित घरेलू कार्य जैसे भोजन बनाने, पानी गर्म करने आदि में ईंधन, जैसे-लकड़ी, कोयला, गोबर के कण्डे, मिट्टी का तेल, गैस आदि का प्रयोग होता हैEssay On Air Pollution In Hindi। इस जलाने की क्रिया में कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, सल्फर-डाई-ऑक्साइड आदि गैसें उत्पन्न होती हैं जो वायु को प्रदूषित करती हैं।

(ii) वर्तमान युग में परिवहन के क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हुई है, इससे आज जहाँ दूरियाँ सिमट कर रह गई हैंEssay On Air Pollution In Hindi वहीं वायु प्रदूषण का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है।

(iii) समस्त ऊर्जा चालित वाहनों में आंतरिक दहन से शक्ति प्राप्त होती हैEssay On Air Pollution In Hindi और साथ में धुआँ निकलता है जो विषैली गैसों एवं हानिकारक प्रदूषण तत्वों से युक्त होता है। इनसे निकले धुएँ में हानिकारक कार्बन मोनो ऑक्साइड और सीसे के कण भी होते हैं जो वायु प्रदूषण में वृद्धि करते हैं।

(iv) धूम कुहरे का जन्म भी पेट्रोल एवं डीजल से निकले नाइट्रोजन के ऑक्साइड से होता है जो सूर्य के प्रकाश में हाइड्रो कार्बन से क्रिया कर घातक प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे को जन्म देता है।

(v) विकसित देशों की तुलना में हमारे देश में वाहनों की संख्या कम हैEssay On Air Pollution In Hindi किंतु वायु प्रदूषण कम नहीं क्योंकि यहाँ के वाहनों के इंजन पुराने होते हैं, उनका रख-रखाव ठीक नहीं होता और सामान्य वाहन वाले उनसे होने वाले पर्यावरण प्रदूषण के प्रति उदासीन हैं ।

(vi) जहाँ कोयले को जला कर ताप ऊर्जा प्राप्त की जाती है वहाँ वायु प्रदूषण का खतरा अधिक हो जाता हैEssay On Air Pollution In Hindi क्योंकि इस प्रक्रिया में अत्यधिक कोयला जलाया जाता है। फलस्वरूप प्रदूषण फैलाने वाली गैसें जैसे सल्फर-डाई-ऑक्साइड, कार्बन के ऑक्साइड तो वायुमण्डल में फैलती ही हैं, इसके अतिरिक्त कोयले की राख एवं कार्बन के सूक्ष्म कण इसके चारों ओर के वायु मण्डल में फैल जाते हैं।

(vii) वायु प्रदूषण के लिए जहाँ एक ओर परिवहन उत्तरदायी है तो दूसरी ओर उद्योग।Essay On Air Pollution In Hindi वास्तविक रूप से वायु प्रदूषण औद्योगिक क्रांति की देन है। उद्योगों में एक ओर दहन क्रिया होती है तो दूसरी ओर विविध पदार्थों का धुआँ जो औद्योगिक चिमनियों से निकलकर वायु मण्डल में विलीन हो जाता है तथा जिसका परिणाम वायु प्रदूषण होता है।

(viii) उद्योगों के कारण लॉस एंजिल्स शहर पर सदैव धुएँ का बादल छाया रहता है। जापान में जब वायु प्रदूषण अधिक होता है तो बच्चों को स्कूल जाते समय मुंह पर जाली पहना दी जाती है। भारत में यद्यपि उद्योगों द्वारा वायु प्रदूषण औद्योगिक देशों की तुलना में कम है किंतु कुछ नगरों में जहाँ पर्याप्त उद्योग हैं, इसका स्तर स्वास्थ्य को

खतरा पैदा कर रहा है।

(ix) इसी प्रकार अम्लीय वर्षा भी वायु प्रदूषण का एक खतरनाक प्रकार है।Essay On Air Pollution In Hindi अम्लीय वर्षा तब होती है जब सल्फर-डाई-ऑक्साइड (SO2) वायु में पहुँच कर सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4) बन जाता है जो सूक्ष्म कणों के रूप में गिरता है जिसमें सल्फेट आयन अधिक होता है। इस प्रकार का जल मानव एवं वनस्पति दोनों के लिए हानिकारक होता है ।

(x) वर्तमान समय में कृषि की प्रक्रिया से भी वायु प्रदूषण होने लगा हैEssay On Air Pollution In Hindi। यह प्रदूषण कीटनाशक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग से हो रहा है। कृषि में विभिन्न प्रकार की बीमारियों को रोकने के लिए विषैली दवाओं का छिड़काव किया जाता है, कभी-कभी यह छिड़काव हेलीकोप्टर या छोटे विमानों द्वारा भी किया जाता है ।

(xi) अनेक प्रकार के पेंट, स्प्रे, पॉलिश आदि करने के लिए जिन विलायकों का प्रयोग किया जाता हैEssay On Air Pollution In Hindi वे हवा में फैल जाते हैं क्योंकि इनमें हाइड्रो कार्बन पदार्थ होते हैं और वायु को प्रदूषित कर देते हैं।

(xii) परमाणु शक्ति का प्रयोग जहाँ एक ओर असीम शक्ति प्राप्त करने के लिये किया जा रहा है, वहीं तनिक-सी असावधानी न केवल वायु प्रदूषण अपितु मौत का कारण बन जाती है।

(xiii) हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों से वहाँ का वायुमण्डल इतना अधिक प्रदूषित हुआ कि उसके कतिपय अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं।

वास्तव में मानव ने उद्योग, परिवहन, ऊर्जा आदि के क्षेत्रों में जो प्रगति की है उसका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव वायु प्रदूषण के रूप में हो रहा है। यह संकट आज संपूर्ण विश्व पर गहराता जा रहा है।

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वायु प्रदूषण के प्रकार

वायु प्रदूषण प्रदूषण के प्रकारों में से ही एक है, लेकिन वायु प्रदूषण के अपने भी कुछ प्रकार हैं जैसे-

विविक्त प्रदूषण- वायु में अनेक प्रदूषक ठोस रूप में उड़ते हुए पाये जाते हैं।Essay On Air Pollution In Hindi ऐसे प्रदूषकों में धूल, राख आदि शामिल हैं। ये कण बड़े-बड़े आकार के होते हैं और पृथ्वी की सतह पर फैलकर प्रदूषण फैलाते हैं। इस प्रकार का प्रदूषण विविक्त प्रदूषण कहलाता है।

गैसीय प्रदूषण- मानव क्रियाओं के द्वारा अनेक प्रकार की गैसों का निर्माण होता हैEssay On Air Pollution In Hindi और इस निर्माण में अनेक प्राकृतिक तत्वों के मिश्रण का भी योगदान रहता है। जब हवा में ऑक्साइड और नाइट्रोजन की ऑक्साइड ईधन के जलने पर निकलने वाला धुंआ मिल जाता है, तो वह गैसीय प्रदूषक कहलाता है।

रासायनिक प्रदूषण- आधुनिक उद्योगों में अनेक रासायनिक पदार्थों का प्रयोग होता है व इन उद्योगों से निकलने वाली गैसें, धुएँ इत्यादि वायुमण्डल में विषैली रासायनिक गैसें वायु को प्रदूषित करती हैं। 

धुआँ और धुंध प्रदूषण- वायुमण्डल में धुआँ (स्मोक) व कोहरा (फॉग) अर्थात् वायु में विद्यमान जलवाष्प व जल की बूँदों के महीन कण के संयोग से धुंध (स्मॉग) बनती है, जो वायुमण्डल में घुटन पैदा करती है और दृश्यता कम कर देती है।

वायु प्रदूषण के प्रभाव

वायु प्रदूषण के अनियंत्रित होने से इसके कई दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, जो पृथ्वी के भविष्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। वायु प्रदूषण के गंभीर दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं-

बीमारियों का बढ़ना

इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु और मनुष्य को स्वच्छता की आवश्यकता होती है।Essay On Air Pollution In Hindi इसके बिना वे एक पल भी जीवित नहीं रह सकते हैं। अगर हवा प्रदूषित होगी, तो इसके कारण अस्थमा, दमा, कैंसर, सिर दर्द, पेट की बीमारियां, एलर्जी, दिल की बीमारी आदि हो सकती हैं, जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक हैं। इन बीमारियों के कारण प्रतिदिन कई लोगों की मृत्यु हो रही है।

ऑक्सीजन कम होना

हमारे वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा 24 प्रतिशित थी लेकिन धीरे-धीरे इसकी मात्रा कम होती जा रही हैEssay On Air Pollution In Hindi। एक रिसर्च के अनुसार हमारे वातावरण में अभी ऑक्सीजन की मात्रा घटकर 22 प्रतिशत ही रह गई है।

पशु-पक्षियों की समय से पहले मृत्यु

स्वच्छ हवा और ऑक्सीजन की कमी के कारण असमय जीव-जंतुओं की मृत्यु हो रही है और साथ ही कुछ प्रजातियां तो विलुप्त भी हो गई हैं।Essay On Air Pollution In Hindi अगर ऐसे ही वायु प्रदूषण होता रहा, तो एक दिन सभी जीव जंतु की प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएंगी।

वातावरण प्रभावित होना

वायु में प्रदूषण की मात्रा अधिक होने के कारण पृथ्वी का पूरा वातावरण प्रभावित हो रहा है।Essay On Air Pollution In Hindi इसके कारण पृथ्वी का संतुलन भी बिगड़ रहा है। आए दिन कोई ना कोई आपदा आती रहती है। इसका कारण प्रदूषण ही है। अगर हमें हमारे वातावरण को बचाना है, तो वायु प्रदूषण को कम करना होगा।

अम्लीय वर्षा होना

वायु प्रदूषण के कारण शुद्ध हवा में कई प्रकार की हानिकारक गैसें मिल जाती हैं जिनमें सल्फर डाइऑक्साइड सबसे खतरनाक होती है। यह हवा में घुल जाती है और जब बारिश होती है, तो जल के साथ क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है, जिससे अम्लीय वर्षा होती है।Essay On Air Pollution In Hindi इसे आम भाषा में हम तेजाब वर्षा या ऐसिड रेन भी कहते हैं जिसके कारण कई बीमारियां फैलती हैं। यह पानी में घुलने के कारण सीधे हमारे शरीर में चली जाती हैं जिससे कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं।

तापमान का बढ़ना

वायु प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैEssay On Air Pollution In Hindi। एक शोध के अनुसार अगर इसी तेजी से वायु प्रदूषण बढ़ता रहा, तो पृथ्वी का तापमान भी तेजी से बढ़ जाएगा। जबकि अगर पृथ्वी का तापमान 2 से 3 प्रतिशत भी बढ़ता है, तो पृथ्वी के हिम ग्लेशियर पिघल जाएंगे जिससे भयंकर बाढ़ आ सकती है और पूरी पृथ्वी नष्ट हो सकती है।

वायु प्रदूषण के निवारण

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हमें छोटे-छोटे उपायों से ही शुरुआत करनी होगी। सबकी भागीदारी ही वायु प्रदूषण को खत्म करने में मदद करेगी। वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय इस प्रकार हैं-

ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाना– अगर हमें वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है, तो हमें अधिक से अधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाने चाहिए।Essay On Air Pollution In Hindi पेड़-पौधों से ही ऑक्सीजन निकलती है और यह कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं जिसके कारण ज्यादातर प्रदूषित हवा साफ हो जाती है। वर्तमान में पेड़-पौधों को अधिक मात्रा में काटा जा रहा है जिसके कारण वायु प्रदूषण अधिक मात्रा में फैल रहा है।

जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना– आज पूरी दुनिया जनसंख्या वृद्धि की समस्या से जूझ रही हैEssay On Air Pollution In Hindi। अगर हम जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण कर लेते हैं, तो वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की भी कमी होगी और हमें कम उद्योग धंधे लगाने की आवश्यकता होगी जिससे प्रदूषण की मात्रा में कमी आएगीEssay On Air Pollution In Hindi। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि ही है।

उद्योग और कारखाने कम करना– हमें उन उद्योगों और कारखानों को बंद कर देना चाहिए जिनसे अधिक मात्रा में प्रदूषण होता है।Essay On Air Pollution In Hindi जिन कल कारखानों की हमें आवश्यकता है उनकी चिमनीयों की ऊंचाई अधिक होनी चाहिए

जिससे हमारा वायुमंडल कम से कम प्रभावित हो।

ऊर्जा के नए स्रोत तलाशें– हमें ऊर्जा के लिए नए स्रोत खोजने चाहिएEssay On Air Pollution In Hindi। हमें कोयले और परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कम करना चाहिए। हमें सौर ऊर्जा का इस्तेमाल अधिक मात्रा में करना चाहिए जिसके कारण वायु प्रदूषण भी नहीं होगा और हमें ऊर्जा भी पूरी मिल जाएगी।

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credit:Silent Course

उप-संहार

प्रदूषण की समस्या पर अच्छे-अच्छे निबंध, लेख, भाषण, स्लोगन आदि लिखने से या बच्चों के सामने बड़ी-बड़ी बाते करने से प्रदूषण की समस्या का इलाज नहीं किया जा सकता है। प्रदूषण का इलाज तभी संभव है जब हम खुद जागरूक होंगे और अपने से ही इसे खत्म करने की शुरुआत करेंगे। जमीनी स्तर पर कार्य करके ही हम अपनी प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा कर पाएंगे और आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर भविष्य दे पाएंगे।

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