Essay On Durga Puja In Hindi

Essay On Durga Puja In Hindi

Essay On Durga Puja In Hindi:भारत त्योहारों और मेलों की भूमि है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और वे सभी पूरे साल अपने-अपने त्योहारों और उत्सवों को मनाते हैं।

Essay On Durga Puja In Hindi

यह इस ग्रह पर पवित्र स्थान है, जहाँ बहुत सी पवित्र नदियाँ हैं और बड़े धार्मिक त्योहारों और उत्सवों को मनाया जाता है।

प्रस्तावना

लोगों विशेष रुप से, पूर्वी भारत के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला नवरात्र (अर्थात् नौ रातों का त्योहार) या दुर्गा पूजा एक त्योहार है। यह पूरे देश भर में खुशहाली पूर्ण उत्सवों का वातावरण लाता है। लोग देवी दुर्गा की पूजा के लिए मंदिरों में जाते हैं या घर पर ही पूरी तैयारी और भक्ति के साथ अपने समृद्ध जीवन और भलाई के लिए पूजा करते हैं।

दुर्गा पूजा का उत्सव

नवरात्र या दुर्गा पूजा का उत्सव बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत के रुप में मनाया जाता है। भक्तों द्वारा यह विश्वास किया जाता है कि, इस दिन देवी दुर्गा ने बैल राक्षस महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। उन्हें ब्रह्मा, भगवान विष्णु और शिव के द्वारा इस राक्षस को मारकर और दुनिया को इससे आजाद कराने के लिए बुलाया गया था। पूरे नौ दिन के युद्ध के युद्ध के बाद, उन्होंने उस राक्षस को दसवें दिन मार गिराया था, वह दिन दशहरा कहलाता है। नवरात्र का वास्तविक अर्थ, देवी और राक्षस के बीच युद्ध के नौ दिन और नौ रात से है। दुर्गा पूजा के त्योहार से भक्तों और दर्शकों सहित विदेशी पर्यटकों की एक स्थान पर बहुत बड़ी भीड़ जुड़ी होती है।

दुर्गा पूजा कब है?

दुर्गा पूजा का पर्व साल में दो बार आता है. ये पर्व चैत्र महीने में तथा आश्विन महीने में आता है. चैत्र नवरात्र को हम वासन्तिक नवरात्र कहलाता है. तथा आश्विन नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहते है.ये अंग्रेजी महीनो में इस साल 11 अक्टूम्बर से 15 अक्तूबर तक सम्पुर्बं देश में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

दुर्गा पूजा का पर्व नौ दिनों तक चलता है. तथा इन सभी दिनों में दुर्गा के नौ रूपों की विविध रूप से पूजा की जाती है. हर साल की तरह इस साल भी नवरात्र आश्विन माघ की शुरुआत से दशहरे तक चलेगा.

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पूजा विधि

माता दुर्गा के इस पर्व की शुरुआत प्रतिपदा से होती है. दुर्गा पूजा के इस पर्व के पहले दिन को विद्यालय में अवकाश रखा जाता है. तथा इस दिन को नवरात्रा स्थापना दिवस के रूप में मनाते है. इस दिन से श्रीद्धालू उपवास रखते है. तथा मंदिरों में माता की अखंड ज्योत जलाई जाती है.

हर साल मनाए जाने वाले इस पर्व से हमें कुछ न कुछ सिखाकर अपने जीवन के बुरे व्यवहार ओ सुधारने का प्रयास करे. तथा जीवन में शिष्टाचारी बने.

समाज में हो रही अनीतियो अत्याचारों और भ्रष्टाचारो से दूर हमें सम्मानित समाज का निर्माण करना है.आज के इस पर्व पर हमेर महिलाओ की सुरक्षा और उनके महत्व के बारे में बताया जाता है.

आज हमें महिसासुर या रावण बनकर इस जीवन को व्यापन नहीं करना है. बल्कि हमें इस जीवन को माँ दुर्गा की भाँती सत्यता पर टिका रहना है. हमेशा सत्य की जीत होती है.

इस प्रकार दुर्गा पूजा का ये उत्सव मनाया जाता है. इस पर्व से हमें सच्चाई की जीत होती है. सन्देश मिलता है.

दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म के लोगो के लिए महत्वपूर्ण त्यौहार है. ये पर्व सितम्बर मे मनाया जाता है. वैसे ये पर्व पुरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. पर बंगाल और दक्षिण राज्यों में ये काफी प्रसिद्ध उत्सव है.

इस पर्व की शुरुआत आश्विन माह की एकम से होती है. इस पर्व का इतिहास भगवान् राम तथा रावण के युद से माना जाता है. रावन अपने अहंकार में आकर भगवान् राम से युद्ध करता है.

नौ दिन की लम्बी लड़ाई के पश्चात दंसवे दिन दुर्गा को विजय मिली जिस दिन को हम दशहरा तथा विजयदशमी के रूप में मनाते है. इसी दिन भगवान् राम ने भी रावण का वध किया था. यानी इस दिन दो राक्षसों का वध किया गया. जिसकी ख़ुशी में ये पर्व हर साल मनाया जाता है.

इस पर्व पर लोग नौ दिनों तक उपवास रखते है. तथा माता दुर्गा की पूजा करते है. और गरबा नृत्यु कर माता के सभी रूपों की पूजा करते है. नौ दिनों की कठोर पूजा और उपासना के बाद में दसवे दिन दुर्गा की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है. तथा माता से आशीर्वाद लेकर अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रतिज्ञा करते है.

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रावण की शक्ति का सामना करने के लिए राम माता दुर्गा की आशीर्वाद लेकर उनके उपवास करते है. तथा जब तक रावण से युद्ध करते है. उपवास ही रखते है, आख़िरकार नौ दिनों को लम्बी लड़ाई के पश्चात भगवान राम रावण को पराजय कर देते है.

विजय की ख़ुशी में दशहरा मनाया जाता है. तथा इस दिन को विजय के रूप में मनाते है. इसलिए इसे विजयदशमी भी कहते है. नौ दिनों भगवान राम ने दुर्गा की पूजा की तथा उपवास रखा हिन्दू अनुनायी राम का अनुसरण कर नौ दिनों तक उपवास रखते है. तथा दशहरे के दिन रावण के पुतले को जलाते है. और अपना उपवास खोलते है.

इस पर्व पर लोग नौ दिन लगातर रात को गरबा तथा डंडिया खेल खेलते है. जिससे लोगो का खूब मनोरंजन होता है. तथा सभी लोग उपवास रखते है. इस पर्व पर विद्यार्थियों की छुट्टिया होती है. जिस कारण बच्चो को इस पर्व का विशेष इन्तजार रहता है.

इस पर्व के दिनों में कई स्थानों पर मेलो का आयोजन भी होता है. जहां लोग नए नए कपडे खरीदते है. तथा नृत्य करते है. और माँ दुर्गा की पूजा करते है.

माँ दुर्गा शक्ति की देवी है. जिस कारण लोग उपवास रखकर उनसे शक्ति देने और आशीर्वाद पाने लिए उनकी पूजा करते है. इस पर्व की दूसरी कहानी दुर्गा द्वारा महिषासुर का अंत से जुडी हुई है.

जिसमे असुरो के द्वारो देवताओ पर किये जा रहे हमलो को रोकने के लिए सभी देवता अपनी आंतरिक शक्ति से 10 हस्त वाली महिला का रूप धारण करते है. जिसे हम दुर्गा कहते है.

तथा दुर्गा शक्तिशाली असुर महिषासुर के अहंकार को चूर-चूर कर उसे हरा देती है. नौ दिन तक ये युद्ध चलता है. तथा दसवे दिन महिषासुर दुर्गा के हाथो मारा जाता है.

इस दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है. वाल्मीकि की रामायण में राम ने दुर्गा की पूजा कर उनसे आशीर्वाद लेकर रावण का वध किया था. तथा दोनों युद्ध का अंत दशहरे के दिन होता है. जिसे विजयदशमी के रूप में हम मानाते है. जो अच्छाई प्रतीक माना जाता है.

इन कहानियो के साथ इस पर्व को कौस्ता से जोड़ा जाता है. जिन्हें इस दिन अपती के वृक्ष से स्वर्ण मुद्राए प्राप्त हुई. इस पर्व से जुडी सभी कहानिया हमें जीवन में अच्छे कर्म करने का सन्देश देती है.

कई लोग इस पर्व पर गरीबो को भोजन करवाते है. इस पर्व पर महिलाओ और बालिकाओ का सम्मान विशेष रूप से देखा जाता है. इस पर्व में सभी महिलाओ को दुर्गा की भांति माना जाता है.

इस पर्व के दिनों में कई स्थानों पर मैले भी भरते है. जहा लोगो को भीड़ जमा रहती है. मैलो में लोग दुर्गा का रूप धारण कर नृत्य करते है. तथा लोगो का मनोरंजन करते है.

कई लोगो का समूह रामलीला का कार्यक्रम प्रस्तुत करते है. जिसे लोग काफी पसंद करते है. इस प्रकार ये पर्व मनोरंजन की दृष्टि से सबसे लोकप्रिय पर्व है.

दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म का त्यौहार है. इस त्यौहार को मानाने के लिए विशेष समारोह का आयोजन होता है. इस पर्व का समरोह एक दो नहीं पुरे 10 दिन तक चलता है. ये पर्व काफी प्राचीन है.

पिछली कई सदियों से इस पर्व को हिन्दू धर्म के लोग मनाते आए है. ये पर्व पारम्परिक पर्व है. इस पर्व को भारतीय संस्कृति विरासत से जोड़ा गया है. हमारी संस्कृति की कुछ नीतिया इसमे शुमार है. जैसे उपवास करना, पूजा-अर्चना तथा दावत आदि इस पर्व में हमें देखने को मिलता है.

इस पर्व से महिलाओ की शक्ति तथा उनके महत्व को समझा जाता है. इस पर्व पर कन्या पूजन किया जाता है. इस पर्व के शुरूआती सात दिनों के पश्चात कन्या पूजन तथा दुर्गा पूजन शुरू किया जाता है. जो दशहरे तक चलता है. दुर्गा पूजा माँ दुर्गा के सम्मान में दुर्गा को समर्पित उत्सव है.

इस उत्सव पर कई लोग दुर्गा का रूप धारण करते है. तो कुछ लोग रामीलाल का कार्यक्रम कर लोगो में आस्था की दीपक जलाते है. तथा लोगो का मनोरंजन करते है. माता दुर्गा को हिमाचल तथा मेंका की पुत्री माना जाता है.

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credit:Learn Essay Speech

उपसंहार :

दुर्गा पूजा को वास्तव रूप में शक्ति पाने की इच्छा से मनाया जाता है जिससे विश्व की बुराईयों का अंत किया जा सके। जिस प्रकार देवी दुर्गा ने ब्रह्मा, विष्णु और शंकर की शक्तियों को इकट्ठा करके दुष्ट राक्षस महिषासुर का नाश किया था और धर्म को बचाया था उसी प्रकार हम अपनी बुराईयों पर विजय प्राप्त करके मनुष्यता को बढ़ावा दे सकें। दुर्गा पूजा का यही संदेश होता है। हर पर्व या त्योहार का मनुष्य के जीवन में अपना विशेष महत्व होता है, क्योंकि इनसे न केवल विशेष प्रकार के आनंद की प्राप्ति होती है बल्कि जीवन में उत्साह एवं नव ऊर्जा का संचार भी होता है| दुर्गपूजा भी एक ऐसा ही त्योहार है, जो हमारे जीवन में उत्साह एवं ऊर्जा का संचार करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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