Essay On Friendship In Hindi (1)

Essay On Friendship In Hindi

Essay On Friendship In Hindi:एक हास्य कवि द्वारा कहा गया है- दोस्त दो प्रकार के होते है, पहला- हेम्योपैथी- जो मुसीबत के समय में काम नहीं आते हैं, तो किसी प्रकार का व्यक्ति को नुकसान भी नहीं पहुंचाते हैं। दूसरा ऐलोपैथी- यह छोटे- मोटे मुसीबत पर तो काम आते हैं पर बड़े मुसीबत का कुछ निश्चित रूप से कह नहीं सकते। जो भी हो यह बस हास्य का विषय है। व्यक्ति जो समस्या अपने परिवार के साथ भी बांट नहीं पाता वह मित्रता में दोस्तों को बड़े आराम से बता देता है। जिसके साथ हम जीवन के उत्तसाह, हर्ष, उल्लास, खुशी, तथा शोक को बिना किसी तोड़ मरोड़ के साथ बांट सके वहीं व्यक्ति का सच्चा मित्र है।

Essay On Friendship In Hindi

मित्र हमें हर बुरे कार्यों से बचाता है तथा जीवन के हर कठिनाई में हमारे साथ रहता है।

प्रस्तावना

जीवन के विभिन्न पढ़ाव पर व्यक्ति की मित्रता

दोस्ती जीवन में व्यक्ति को कई बार हो सकता है तथा किसी से भी हो सकता है, इसमे चिंता तथा स्नेह की भावना होती है। दोस्ती के विभिन्न प्रकार-

बचपन या स्कूल की दोस्ती-

एक ब्रेंच पर बैठ कर उस ब्रेंच पर अपना नाम लिखना हम दोस्तों के साथ ही करते है। कॉपी के बीच पेंसिल के छिलके, मोरपंख रखना यह कह कर कि विद्या आएगी, बिना किसी बात के टीचर के क्लास लेने के दौरान मुँह पर हाथ रख हसना, और सज़ा मिलने पर भी कोई खास फर्क नहीं पड़ना, सच में सबसे सुखद समय होता है। बचपन की दोस्ती हमेशा मीठी याद बन कर हमारे साथ रहती है।किशोरावस्था और कॉलेज की दोस्ती- कैंटीन के वो चाय समोसे, बाईक पर ट्रिपलिंग, दोस्त के पिट जाने पर कारण का भी पता न लगाया और लड़ाई के लिए उत्तेजित हो जाना। क्लास बंक मार कर बाहर किसी बगीचे में बैठे रहना, परीक्षा के बिलकुल करीब आ जाने पर रात भर कॉल पर नोट्स जुगाड़ करने की बाते और बीच-बीच में क्रश का ज़िक्र दोस्ती की निशानी है। जीवन के उस आनंद भरे लम्हों में से है जिसे हम कभी भुल नहीं सकते हैं।

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ऑफिस (दफ्तर) की दोस्ती-

 ऑफिस के दोस्तों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का होना हमें और मेहनती बनाता है। इसके साथ ही काम के दबाव के बीच किसी एक बेतुके से जोक पर हसना, लंच टाईम में घर की वो सांस बहु की बातें, श्री मति वर्मा के लड़के की शादी न हो पाने की बात या बॉस से पड़ी डाट पर दोस्तों का समझाना “तुमसे यह काम हो पाएगा” हिम्मत देता है।

सोशल मीडिया की दोस्ती-

 आज के समय में सोशल मीडिया की दोस्ती का बहुत अधिक प्रचलन है, हम अपने दोस्तों के समुह में बैठ कर एक दूसरे से बात करने के स्थान पर अपने सोशल साइट्स के दोस्तों के साथ बात करते हैं। देश के कोने-कोने तक हमारे मित्र फैले होते हैं। जिनसे कभी मिलना तो नहीं हो पाता पर हम अपनी समस्या उनके साथ बांटते हैं। सोशल मीडिया पर 2015 में, 1985 के बीछड़ें दोस्त मिल जाते हैं।

वृद्धावस्था की दोस्ती-

 कहा गया है, वृद्धावस्था सबसे कठिन अवस्था है, इस में व्यक्ति को दोस्तों की आवश्यकता होती है। जिनके साथ वह अपना सुख-दुख बाँट सके। सुबह-सुबह बगीचे में एक साथ लाफ्टर योगा तथा आसन करना साथ टहलना, चाय के साथ कॉलोनी के अन्य लोगों की बाते या शाम में किसी दुकान पर अपने पुराने दोस्तों के साथ ढ़ेर सारी पुरानी बाते जीवन के तनाव को कम कर देता है।

दोस्ती का अर्थ

अनेक बार लोग दोस्ती को लेकर मन में यह भ्रम पाल लेते है कि ज्यादातर साथ-साथ रहने वाला इंसान ही हमारा मित्र होता हैं। लेकिन सच्चा मित्र न केवल साथ-साथ रहता है बल्कि इससे बढ़कर वह हमेशा हमारा शुभचिंतक तथा हमारी प्रगति, उन्नति तथा विकास में भी बराबर भागीदार होकर सदा ही हमारा साथ देता हैं।

सिर्फ सुख के पलों की कामना करना और उसमें ही साथ देना ही दोस्ती नहीं हैं। वरन् विपदा के काल में भी सहारा बनकर हर तरह से अपने दोस्त की मदद करता है वही सच्चा दोस्त होता हैं। हालांकि ऐसे कोई विशेष नियम नहीं है, कि कौन मित्र हो सकता है और कौन नहीं। इसलिए हमे हमेशा सोच समझकर से अच्छे और भले व्यक्ति से मित्रता का सम्बन्ध बनाना चाहिए।

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मानव जीवन में दोस्ती का महत्व

हमारे जीवन में दोस्ती का बड़ा महत्व हैं। जातीय रिश्तों में और खून के रिश्ते परस्पर स्वार्थ की भावना किसी न किसी रूप में विद्यमान रहती हैं। मगर दोस्ती का रिश्ते को इन बुराइयों से परे समझा जाता हैं। व्यक्ति का जो सच्चा मित्र होता है। इस प्रकार हम यह कह सकते है, कि सच्चा मित्र वही होता हैं। जो न केवल हमारे सुख दुःख का साथी हो बल्कि वह एक मार्गदर्शक तथा स्नेहिल के रूप में सदैव निस्वार्थ मदद का भाव रखे। भले ही हम रंग रूप और आदतों में वैक्तिक भिन्नता रखते हैं। मगर एक दूसरे के प्रिय होने के रिश्ते को मित्रता के रूप में निभाया जाता हैं। वफादारी इस सम्बन्ध का आधारभूत होती हैं। जब तक पारस्परिक वफादारी में कुटिलता नहीं आएगी। दोस्ती ऐसे ही बढ़ती जाएगी l

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मैत्री और इसकी विशेषताएं :

मैत्री आपसी विश्वास, स्नेह और आम हितों के आधार पर एक संबंध है। मैत्री लोगों के बीच एक गहरा संबंध है, जिसका अर्थ है कि केवल वफादारी और आपसी सहायता नहीं, बल्कि आंतरिक निकटता, स्पष्टता, प्यार।

बाइबिल में दोस्ती की अवधारणा को ग्रीक संज्ञा “फिलिया” और क्रिया “फिलेओ” के साथ अभिव्यक्त किया गया है, जिसका अनुवाद “प्रिय रखने के लिए” (कोई) है। इस शब्द का अर्थ है “गरमी, निकटता और स्नेह” “फिलिया” गर्म दोस्ताना (भाई) प्रेम है परस्पर सम्मान के आधार पर। लग रहा है कि हमारे दिलों में अनायास प्रकट होता है|

तो हम देख सकते हैं कि दोस्ती एक भावना है, सबसे पहले, विशेष रूप से मैत्रीपूर्ण प्रेम में। यह कुछ बाहरी नहीं है, दोस्ती दिल में गहरी है। दूसरी बात, दोस्ती सहजता से प्रकट होती है आप अपने आप को मित्र बनने के लिए नहीं बना सकते हैं, या किसी भी व्यक्ति को अपने दोस्त बनने के लिए विस कर सकते हैं। तीसरा, मित्रता कुछ निश्चित आधार पर आधारित होती है जो इसके प्रदर्शित होने और संरक्षण के लिए आवश्यक होती है। ये मैदान निम्नलिखित हैं:

परस्पर आदर:

 इसका क्या मतलब है “अपने दोस्त का सम्मान”? इसका मतलब है कि आपको उसका आदर करना चाहिए, अपनी राय के साथ गणित करना और उसके सकारात्मक गुणों को पहचानना चाहिए। सम्मान शब्दों और कार्यों में व्यक्त किया जाता है एक दोस्त, जो सम्मान महसूस करता है, का मानना है कि वह एक व्यक्ति के रूप में मूल्यवान है, कि उसकी गरिमा का सम्मान किया जाता है और किसी ने उसे सिर्फ कर्तव्य की भावना के कारण ही नहीं किया है।

भरोसा:

भरोसे का मतलब है एक दोस्त की ईमानदारी पर विश्वास, कि वह जानबूझकर धोखा नहीं करेगा| विश्वास का मतलब यह नहीं है कि आपका मित्र कभी गलती नहीं करेगा|

दोस्ती के लिए ये दो बुनियादी और मुख्य स्थितियां हैं इसके अलावा दोस्ती के लिए महत्वपूर्ण है, उदाहरण के लिए, समान हितों या सामान्य नैतिक मूल्यों के लिए। उन लोगों के लिए मित्र रहना मुश्किल होगा, जिनके बारे में अलग-अलग समझ है कि क्या

अच्छा है और क्या गलत है। इसका कारण बहुत सरल है: क्या हम एक मित्र (और शायद विश्वास) के प्रति सम्मान दिखा सकते हैं जब हम देखते हैं कि वह हमारे लिए अनैतिक काम करता है, और सोचता है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है?

आम हितों, जैसा कि हमने पहले ही उल्लेख किया है, मित्रों को बनाने में भी योगदान देता है। हालांकि, दोस्ती के लिए कई वर्षों तक रहता है और समय-परीक्षण किया जाता है, यह कारक बहुत महत्वपूर्ण नहीं है।

credit:Hindi-English Learning

उपसंहार

उम्र के हर पढ़ाव पर व्यक्ति के जीवन में दोस्तों का अलग महत्व होता है। कभी साथ क्लास बंक करने का तो कभी ऑफिस के दोस्तों के साथ मूवीं का प्लान, तो कभी कॉलोनी के किसी छत पर सूख रहे आचार, आम, पापड़ पर समुह में अपना ही हक समझना, चाय के साथ गप-शप हो या किसी के मुसीबत के घड़ी में साथ खड़े रहना दोस्त हमेशा एक भावनात्मक सहायता तथा सुरक्षा प्रदान करते हैं।

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