essay on yoga in hindi

Essay On Yoga In Hindi

प्रस्तावना

Essay On Yoga In Hindiशरीर, मन और आत्मा को नियंत्रित करने में योग मदद करता है। शरीर और मन को शांत करने के लिए यह शारीरिक और मानसिक अनुशासन का एक संतुलन बनाता है। यह तनाव और चिंता का प्रबंधन करने में भी सहायता करता है और आपको आराम से रहने में मदद करता है।

Essay On Yoga In Hindi

योग आसन शक्ति, शरीर में लचीलेपन और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए जाना जाता है।

योग के फायदे

मांसपेशियों के लचीलेपन में सुधार

शरीर के आसन और एलाइनमेंट को ठीक करता है

बेहतर पाचन तंत्र प्रदान करता है

आंतरिक अंग मजबूत करता है

अस्थमा का इलाज करता है

मधुमेह का इलाज करता है

दिल संबंधी समस्याओं का इलाज करने में मदद करता है

त्वचा के चमकने में मदद करता है

शक्ति और सहनशक्ति को बढ़ावा देता है

एकाग्रता में सुधार

मन और विचार नियंत्रण में मदद करता है

चिंता, तनाव और अवसाद पर काबू पाने के लिए मन शांत रखता है

तनाव कम करने में मदद करता है

रक्त परिसंचरण और मांसपेशियों के विश्राम में मदद करता है

वज़न घटाना

चोट से संरक्षण करता है

ये सब योग के लाभ हैं। योग स्वास्थ्य और आत्म-चिकित्सा के प्रति आपके प्राकृतिक प्रवृत्ति पर ध्यान केंद्रित करता है।

योग सत्र में मुख्य रूप से व्यायाम, ध्यान और योग आसन शामिल होते हैं जो विभिन्न मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। दवाओं, जो हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, से बचने का यह एक अच्छा विकल्प है।

योग अभ्यास करने के मुख्य लाभों में से एक यह है कि यह तनाव कम करने में मदद करता है। तनाव का होना इन दिनों एक आम बात है जिससे शरीर और मन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। तनाव के कारण लोगों को सोते समय दर्द, गर्दन का दर्द, पीठ दर्द, सिरदर्द, तेजी से दिल का धड़कना, हथेलियों में पसीने आना, असंतोष, क्रोध, अनिद्रा और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं। समय गुज़रने के साथ इन प्रकार की समस्याओं का इलाज करने में योग वास्तव में प्रभावी है। यह एक व्यक्ति को ध्यान और साँस लेने के व्यायाम से तनाव कम करने में मदद करता है और एक व्यक्ति के मानसिक कल्याण में सुधार करता है। नियमित अभ्यास मानसिक स्पष्टता और शांति बनाता है जिससे मन को आराम मिलता है।

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अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस

अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस की घोषणा (संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा में) 21 जून को भारत की पहल और सुझाव के बाद की गयी थी। योग में विभिन्न प्रकार के प्राणायाम और कपाल-भाति जैसी योग क्रियाएं शामिल हैं, जो सबसे ज्यादा प्रभावी सांस की क्रियाएं हैं। इनका नियमित अभ्यास करने से लोगों को सांस संबंधी समस्याओं और उच्च व निम्न रक्तदाब जैसी बीमारियों में आराम मिलता है। योग वो इलाज है, यदि इसका प्रतिदिन नियमित रुप से अभ्यास किया जाए, तो यह बीमारियों से धीरे-धीरे छुटकारा पाने में काफी सहायता करता है। यह हमारे शरीर में कई सारे सकारात्मक बदलाव लाता है और शरीर के अंगों की प्रक्रियाओं को भी नियमित करता है। विशेष प्रकार के योग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं, इसलिए केवल आवश्यक और बताये गए योगों का ही अभ्यास करना चाहिए।

आंतरिक शांति

योग हमारे शरीर में शांति बढ़ाने और हमारे सभी तनाव तथा समस्याओं मुक्ति दिलाने का कार्य करता है। योग और इसके लाभों के बारे में दुनिया भर के लोगों को जागरूक करने के लिए वार्षिक रुप से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस) कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसका अभ्यास लोगों के द्वारा किसी भी आयु में किया जा सकता है जैसे बचपन, किशोरावस्था, वयस्क या वृद्धावस्था। इसके लिए नियंत्रित तरीके से सांस लेने के साथ सुरक्षित, धीमे और नियंत्रित शारीरिक गतिविधियों की भी आवश्यकता होती है। वयस्कों और बच्चों की तुलना में वयस्कों की आयु में सबसे ज्यादा समस्याएं हैं। योग करने से शरीर में शांति का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण हमारे अंदर आत्मविश्वास भी जागृत होता है।

अच्छे योगाभ्यास के लिए जरूरी सावधानियां (Important precautions for good yoga practice)

योगासन लाभकारी है पर कुछ विशेष परिस्थितियों में नुकसान भी कर सकता है। इसलिए योग से जुड़ी ये जरूरी सावधानियां जरूरी करनी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान योग करते समय सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि कुछ ऐसे योग हैं जो इस अवस्था में आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए हमेशा किसी योग गुरु के देखरेख में योग करना चाहिए।

बचपन से ही बच्चों में योग करने की आदत जरूर डालना चाहिए लेकिन यदि बच्चे की उम्र 10 वर्ष से कम है तो उसे बहुत मुश्किल योगाभ्यास ना कराएं।

योगाभ्यास के साथ-साथ अपने जीवन में खान-पान के प्रति संयम बरतें धूम्रपान और मादक पदार्थों के सेवन से परहेज करें क्योंकि यह सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं।

योगाभ्यास के साथ-साथ शरीर के पोषण का भी भरपूर ध्यान रखें हमेशा ऐसा खाना खाएं जिस में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद हो। अन्यथा शरीर में कमजोरी भी आ सकती है।

योगाभ्यास अच्छे जीवन के लिए जरूरी है। लेकिन इसके साथ में नींद भी उतनी ही ज्यादा जरूरी है, क्योंकि नींद भी एक तरह का योग है इसलिए नींद को महत्व देना चाहिए।

योग शुरू करने के लिए जरूरी सुझाव (Important tips to start yoga)

यदि किसी व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी योग नहीं किया और वह अब योग शुरू करना चाहता है तो कुछ बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए जैसे कि:-

योगाभ्यास करते वक्त अपने शरीर पर अनावश्यक दबाव ना डालें। सहजता के साथ जितना योग आपका शरीर कर सकता है सिर्फ उतना ही करें क्योंकि शुरुआती दिनों में आपके शरीर में लचीलेपन की कमी होगी लेकिन जैसे-जैसे योग करते जाएंगे वैसे ही आपका शरीर अधिक लचीला होता जाएगा।

शुरुआत में सिर्फ वही आसान करने की कोशिश करें जिनमें आप सहज महसूस करते हैं। योगासन में सांस लेने और छोड़ने

का बहुत ज्यादा महत्व होता है इसलिए शुरू से ही इस पर ध्यान जरूर दें।

कभी भी जल्दी-जल्दी योगासन नहीं करें हमेशा आराम से योगासन करें और दो योगासनों के बीच कुछ मिनट का अंतराल जरूर रखें।

योगासन की समाप्ति हमेशा शवासन के साथ ही करें।

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योग का इतिहास

हमारे देश में योग का अस्तित्व तब से है जब धर्मों का निर्माण भी नहीं हुआ था। जब कोई सभ्यता नहीं थी उसके पहले भी योग था। योग के पहले ज्ञाता भगवान शिव थे। भगवान शिव से ही यह ज्ञान सप्त ऋषि को मिला। भगवान शिव को इसी वजह से आदियोगी भी कहा जाता है।

फिर इन सप्तऋषियों ने योग का प्रचार प्रसार पूरी दुनिया में किया। लेकिन योग की सबसे ज्यादा अभिव्यक्ति भारत में हुई क्योंकि भारत में ही योग का जन्म हुआ था।

महाभारत, रामायण जैसे कई महाकाव्यों में भी योग के बारे में वर्णन मिलता है। यदि बात करें वर्तमान सभ्यताओं की दो सिंधु घाटी सभ्यता में कई ऐसे अवशेष मिले हैं जो यह बताते हैं कि वहां के लोग योग करते थे।

हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं में तो योग इनके जीवन का हिस्सा है,लेकिन योग के सभी सूत्रों को लिखकर एक जगह समाहित करने का श्रेय महर्षि पतंजलि को जाता है। इसी वजह से इन्हें योग का जनक भी कहा जाता है।

महर्षि पतंजलि ने अपने ग्रंथ में योग के अनेक रूपों का वर्णन किया है। इन्हीं के लिखित ग्रंथों को पढ़कर और उनसे योग की शिक्षा लेकर अनेक ऋषि और योगाचार्य ने योग का प्रचार प्रसार फिर आगे किया।

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योग के प्रकार

योग का विस्तृत वर्णन मुख्य रूप से 2 ग्रंथो में किया गया है। महर्षि पतंजलि द्वारा रचित ग्रंथ में योग का बहुत विस्तार से वर्णन किया गया है। इसके अलावा श्रीमद्भागवत गीता में भी श्री कृष्ण ने योग के कई रूप बताए हैं।

महर्षि पतंजलि द्वारा योग के निम्नलिखित रुप है:-

यम

अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह यह पांचों नियम यम के अंतर्गत आते हैं। ऋषि पतंजलि के अनुसार योग की शुरुआत यम से होती है। यम हमें बताता है कि हमें दुनिया को किस नजर से देखना चाहिए और दुनिया के साथ किस तरह से व्यवहार करना चाहिए।

नियम

संतोष,स्वाध्याय,तप,ईश्वर प्रणिधान और शौच यह पांच नियम कहलाते हैं। ये पांच नियम हमारे लिए बनाए गए हैं

आसन

एक स्थिति में लंबे वक्त तक बैठे रहने की प्रक्रिया ही आसन कहलाती है योग में आसन का बहुत अधिक महत्व है कई अलग-अलग तरह के आसनों का वर्णन योग में मिलता है।

प्राणायाम

प्राणायाम का मतलब होता है अपनी सांसो को लयबद्ध करना ऋषि पतंजलि ने अपने ग्रंथ में बताया है कि हमें हमारे सांस लेने, रोकने और छोड़ने की प्रक्रिया के बीच एक तारतम्य होनी चाहिए।

प्रत्याहार

अपने मन को संकुचित करना एवं बाहरी चीजों से दूर करना ही प्रत्याहार कहलाता है। सुनना, सूंघना, देखना और महसूस करना इन्हीं 4 तरीकों से कोई भी जानकारी हमारे मन मे जाती है। लेकिन प्रत्याहार का अभ्यास करने से इन बाहरी प्रभावों का हमारे मन पर असर नहीं पड़ेगा और हमारा मन स्थिर रहेगा।

credit:Silent Writer

उपसंहार

सभी योग का आखिरी लक्ष्य हमारी चेतना और ब्रम्हांडीय चेतना के बीच एक रूपता स्थित करना है। आचार्य पतंजलि के योग सूत्र और श्री कृष्ण के द्वारा बताए गए योग सूत्रों के नियम जरूर अलग है लेकिन दोनों की मंजिल एक ही बताया गया है।

अपने जीवन के सर्वोच्चम आयाम से परिचित होना चाहते हैं तो योग को जीवन का एक अहम हिस्सा बनाए।

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