Pradushan Essay In Hindi

Pradushan Essay In Hindi – प्रदुषण पर निबंध हिंदी में

Pradushan Essay In Hindi:जैसा कि दुनिया ने शहरीकरण को अपनाया, माँ की प्रकृति ने भारी बोझ उठाते हुए आधुनिक शहरों और महानगरों में तब्दील हो रही हरियाली भूमि को देखा। क्या हुआ कि प्राकृतिक आपदाओं का एक निशान है, चाहे वह भूस्खलन हो या जंगल की आग, हमें संकेत दे रहा है कि ग्रह पृथ्वी के साथ कुछ गलत है।  रहस्यमय तरीके से काम करना जो अक्सर नग्न आंखों को पकड़ नहीं सकता है, एक खतरनाक घटना है जो संभावित रूप से स्वास्थ्य मुद्दों की एक सरणी में योगदान दे रही है।

Pradushan Essay In Hindi

जैसा कि यह एक प्रचलित पर्यावरणीय चिंता है, यह तेजी से स्कूल और कॉलेज परीक्षणों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में लेखन अनुभाग के तहत पूछा जाता है। के इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको आवश्यक ज्ञान के साथ-साथ को तैयार करने के लिए टिप्स और ट्रिक्स की मदद करना है।

जब वायु, जल, मृदा आदि में अवांछनीय तत्व घुलकर उसे इस हद तक गंदा कर देते है, कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने लगे तो उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है। साथ ही यह मानव जीवन के लिए भी खतरे की घंटी है।का एक महत्त्वपूर्ण अंग है

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प्रदूषण के प्रकार:

1.वायु प्रदूषण

Pollution Essay in Hindi वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इन स्त्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है।Pradushan Essay In Hindi दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है। जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ो से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर दी है।

2.जल प्रदूषण

उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह उन्हें प्रदूषित कर देता है। एक समय साफ-सुथरी और पवित्र माने जानी वाली हमारी यह नदियां आज कई तरह के बीमारियों का घर बन गई है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ, रासयनिक कचरा और दूसरे कई प्रकार के नान बायोडिग्रेडबल कचरे मिल गये है।

3.भूमि प्रदूषण

वह औद्योगिक और घरेलू कचरा जिसका पानी में निस्तारण नही होता है, वह जमीन पर ही फैला रहता है। हालांकि इसके रीसायकल तथा पुनरुपयोग के कई प्रयास किये जाते है पर इसमें कोई खास सफलता प्राप्त नही होती है। इस तरह के भूमि प्रदूषण के कारण इसमें मच्छर, मख्खियां और दूसरे कीड़े पनपने लगते है, जोकि मनुष्यों तथा दूसरे जीवों में कई तरह के बीमारियों का कारण बनते है।

4.ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण कारखनों में चलने वाली तेज आवाज वाली मशीनों तथा दूसरे तेज आवाज करने वाली यंत्रो से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही यह सड़क पर चलने वाले वाहन, पटाखे फूटने के कारण उत्पन्न होने वाला आवाज, लाउड स्पीकर से भी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती हैPradushan Essay In Hindi। ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों में होने वाले मानसिक तनाव का मुख्य कारण है, जोकि मस्तिष्क पर कई दुष्प्रभाव डालने के साथ ही सुनने की शक्ति को भी घटाता है।

5.प्रकाश प्रदूषण

प्रकाश प्रदूषण किसी क्षेत्र में अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे रोशनी उत्पन्न करने के कारण पैदा होता है। प्रकाश प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में प्रकाश के वस्तुओं के अत्यधिक उपयोग से पैदा होता है। बिना जरुरत के अत्याधिक प्रकाश पैदा करने वाली वस्तुएं प्रकाश प्रदूषण को बढ़ा देती है, जिससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।

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6.रेडियोएक्टिव प्रदूषण

रेडियोएक्टिव प्रदूषण का तात्पर्य उस प्रदूषण से है, जो अनचाहे रेडियोएक्टिव तत्वों द्वारा वायुमंडल में उत्पन्न होता है। रेडियोएक्टिव प्रदूषण हथियारों के फटने तथा परीक्षण, खनन आदि से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही परमाणु बिजली केंद्रों में भी कचरे के रुप में उत्पन्न होने वाले अवयव भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण को बढ़ाते है।

7.थर्मल प्रदूषण

कई उद्योगों में पानी का इस्तेमाल शीतलक के रुप में किया जाता है जोकि थर्मल प्रदूषण का मुख्य कारण है। इसके कारण जलीय जीवों को तापमान परिवर्तन और पानी में आक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

8.दृश्य प्रदूषण

मनुष्य द्वारा बनायी गयी वह वस्तुएं जो हमारी दृष्टि को प्रभावित करती है दृष्य प्रदूषण के अंतर्गत आती है जैसे कि बिल बोर्ड, अंटिना, कचरे के डिब्बे, इलेक्ट्रिक पोल, टावर्स, तार, वाहन, बहुमंजिला इमारते आदि।

प्रदूषण कम करने के उपाय

जब अब हम प्रदूषण के कारण और प्रभाव तथा प्रकारों को जान चुके हैं, तब अब हमें इसे रोकने के लिए प्रयास करने होंगे।Pradushan Essay In Hindi इन दिये गये कुछ उपायों का पालन करके हम प्रदूषण की समस्या पर काबू कर सकते है।

1.कार पूलिंग

2.पटाखों को ना कहिये

3.रीसायकल/पुनरुयोग

4.अपने आस-पास की जगहों को साफ-सुथरा रखकर

5.कीटनाशको और उर्वरकों का सीमित उपयोग करके

6.पेड़ लगाकर

7.काम्पोस्ट का उपयोग किजिए

8.प्रकाश का अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे उपयोग ना करके

9.रेडियोएक्टिव पदार्थों के उपयोग को लेकर कठोर नियम बनाकर

10.कड़े औद्योगिक नियम-कानून बनाकर

11.योजनापूर्ण निर्माण करके

वायु प्रदूषण कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में वृद्धि के साथ अस्तित्व में आया, प्रदूषकों में वृद्धि के साथ जो हवा को दूषित कर रहे हैं और सांस लेने में तकलीफ के साथ-साथ मनुष्य को त्वचा रोग भी पैदा कर रहे हैं। दूसरे पहलू की बात करें तो पानी के बिना जीवन नहीं है। औद्योगिक विकास, धार्मिक प्रथाओं और अन्य विभिन्न कारणों के नाम पर, जल निकाय प्रदूषित हो रहे हैं, इस प्रकार पीने या किसी अन्य उपयोग के लिए असुरक्षित हो रहे हैं। हम मनुष्य जो कचरा भूमि पर या रासायनिक उर्वरकों पर डंप करते हैं, जो कृषि कार्यों के लिए भूमि पर डाला जाता है, भूमि / मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है। यदि इस तरह की प्रथाओं के कारण मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो जाती है, तो मिट्टी बांझ हो जाएगी और भविष्य में कोई फसल नहीं ली जा सकती है। वायु प्रदूषण के कारण मनुष्य को होने वाली बीमारियाँ अस्थमा, त्वचा के विभिन्न रोग, कैंसर इत्यादि हैं।

योग करने के लिए, किसी भी प्रकार का प्रदूषण पर्यावरण के लिए हानिकारक है जैसे कि ग्लोबल वार्मिंग, असमान जलवायु परिवर्तन आदि। हमारे लालच और अवैध मानवीय गतिविधियों के कारण जानवरों का निर्दोष जीवन खो जाता हैPradushan Essay In Hindi। समय आ गया है कि हम अपने हाथ मिलाएं और वर्तमान पीढ़ियों के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को संरक्षित और संरक्षित करने की दिशा में काम करें।

प्रदूषण के कारण

बेकार पदार्थो की बढ़ती मात्रा और उचित  निपटान  के विकल्पों की कमी के कारण समस्या दिन प्रति  दिन बढ़ती जा रही है। कारखानों और घरों से बेकार उत्पादों को खुले स्थानों में रखा  और जलया  जाता है

जिससे  भूमि, वायु , जल , ध्वनि  प्रदूषित होते हैं| प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों के कारण और प्राकृतिक कारणों के कारण भी होता है।

कीटनाशकों का  बढ़ता उपयोग, औद्योगिक और कृषि  के बेकार पदार्थो के निपटान के लिए विकल्पों की कमी, वनों की कटाई, बढ़ते शहरी करण, अम्लीय वर्षा और खनन इस प्रदूषण के मूल कारक  हैं।

ये सभी कारक कृषि गतिविधियों में बाधा डालते हैं और जानवरों और मनुष्यों में विभिन्न बीमारियों का कारण भी  बनते हैं।Pradushan Essay In Hindi जनसंख्या वृद्धि भी   कारण है बढ़ते हुए प्रदूषण’ का |

प्रदूषण के सोर्स

घरेलू बेकार पदार्थ,जमा  हुआ  पानी,कूलरो  मे पड|  पानी , पौधो मे जमा पानी

2.रासायनिक पदार्थ जैसे – डिटर्जेंट्स, हाइड्रोजन, साबुन, औद्योगिक एवं खनन के बेकार पदार्थ

3. प्लास्टिक

4. गैसें जैसे- कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया आदि।

5. उर्वरक जैसे- यूरिया, पोटाश ।

6.  गंदा पानी

7. पेस्टीसाइड्स जैसे- डी.डी.टी, कीटनाशी।

8. ध्वनि।

9. ऊष्मा।

10. जनसंख्या वृद्धि

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प्रदूषण के परिणाम

आज के समय की मुख्य चिंता है बढ़ता हुआ प्रदूषण | कचरा मैदान के आसपास दुर्गंध युक्त  गंध के कारण सांस लेना दुर्भर होता है | और इसके आस पास का स्थान रहने लायक नहीं रहता | विभिन्न श्वास सम्बन्धी रोग उत्पन्न होते हैं | अपशिष्ट उत्पादों से छुटकारा पाने के लिए जब इन्हे जलाया जाता है तो वायु प्रदूषित होती है |

 अपशिष्ट  पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से त्वचा सम्बन्धी रोग,  विषाक्त पदार्थ विषैले जीव उत्पन्न करते हैं जो की जानलेवा रोगों के कारण बनते हैं | जैसे कि  मच्छर, मख्खियाँ  इत्यादि | कृषि खराब होती है और खाने पीने की वस्तुएँ खाने के लायक नहीं रहती |

पीने   का जल जो कि अमृत माना जाता था वह भी रोगो का साधन बन जाता है Pradushan Essay In Hindi| ध्वनि जो की संगीत पैदा करती थी शोर बन कर मानसिक असंतुलन पैदा करती है |धरती पर ग्रीन कवच भी बहुत कम लगभग तीन प्रतिशत ही बच है जो कि चिन्तनीय है

प्रदूषण को रोकने के उपाय

1.बायोडिग्रेडेबल उत्पादों का उपयोग करें। क्योंकि बायोडिग्रेडेबल कचरे का निपटान करना आसान है।

2.भोजन कीटनाशकों के उपयोग के बिना उगाया जाए, जैविक सब्जियां और फल उगाए जाए |

3.पॉली बैग और प्लास्टिक के बर्तनों और वस्तुओं के उपयोग से बचें।

क्योंकि किसी भी रूप में प्लास्टिक का निपटान करना मुश्किल है।

5.कागज़ या कपड़े की थैलियों का उपयोग करें ।

6. अलग-अलग डस्टबिन में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग निपटाने से कचरा अलग हो जाता हैPradushan Essay In Hindi। भारत सरकार ने पहले ही इस अभियान को शुरू कर दिया है और देश भर के विभिन्न शहरों में विभिन्न क्षेत्रों में कई हरे और नीले डस्टबिन लगाए गए हैं।

7.कागज़  उपयोग को सीमित करें। कागज़ बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष कई पेड़ काटे जाते हैंPradushan Essay In Hindi। यह   प्रदूषण का एक कारण है। डिजिटल प्रयोग  अच्छा विकल्प  है।

8. पुन: उपयोग योग्य डस्टर और झाड़ू का उपयोग करें।

9.प्रदूषण  हानि पहुँचाता है अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के  इस बारे में जागरूक करें ।

10.घरों का कचरा बाहर खुले में नहीं फेंकना चाहिए।

11.खनिज पदार्थ्   भी सावधानी  से प्रयोग करने चाहिए  ताकि  भविष्य के लिये भी प्रयोग किये ज। सके ।

12. हमें वायु को भी कम दूषित करना चाहिए और अधिक से अधिक पेड पौधे  लगाने चाहिये  ताकि अम्लीय वर्षा को रोक।| ज। सके  ।

13. यदि  हम बेहतर जीवन जीन| चाहते  हैं और वातवरन मे  शुध्ध्ता चाहते  हैं वनो को सरन्क्षित  करना  होगा  |

14.हमें ऐसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें हम दोबारा से प्रयोग में ला सके। उपसंहार

credit:SAZ education

उप-संहार / सारांश

प्रदूषण एक प्रकार का धीमा जहर है जो हवा, पानी, धूल आदि के माध्यम से न केवल मनुष्य वरन् जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और वनस्पतियों को भी सड़ा-गलाकर नष्ट कर देता है। आज प्रदूषण के कारण ही  प्राणियों का अस्तित्व खतरे में है। इसी कारण बहुत से प्राणी, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, वन्य प्राणी विलुप्त हो गए हैं।

यदि इसी तरह से प्रदूषण फैलता रहा तो जीवन बहुत ही कठिन हो जायेगा | न खाने को कुछ मिलेगा और सांस लेने के लिए शुद्ध हवा भी नहीं बचेगी | प्यास बुझाने के लिए पानी ढूंढने से नहीं मिलेगा | जीवन बहुत ही असंतुलित होगा | ऐसी परस्थितियो से बचने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण की और कदम बढ़ाने होंगे | जीवन आरामदायक बनाने की अपेक्षा उपयोगी बनाना होगा  कर्तव्यपरायणता की ओर कदम बढ़ने होंगे |

“हम सब मिलकर प्रदूषण को मिटाएंगे, और अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाएंगे।।

आओ मिलकर कसम ये खाये, प्रदुषण को हम दूर भगाये।

“प्रदूषण को रोकने में दे सभी अपना सहयोग, और प्लास्टिक का बंद करें उपयोग।

शर्म करो-शर्म करो करोड़ो रुपये पटाखों पर बर्बाद मत करो-मत करो।

“प्रदूषण का यह खतरनाक जहर, लगा रहा है पर्यावरण पर ग्रहण।

प्रदूषण हटाओ, पर्यावरण बचाओं।

“प्रदूषण की समस्या एक दीमक की तरह है, जो पर्यावरण को धीरे-धीरे खोखला बनाती जा रही है।।

हम सब की है ये जिम्मेदारी, प्रदूषण से मुक्त हो दुनिया हमारी।

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